आ रहा है तुफान ‘सैनार’…ईन राज्यो मे होगी भारी बारीश ; उत्तर भारत और मध्य भारत में इन दिनों उत्तरी हवाओं का प्रभाव साफ तौर पर देखा जा रहा है। मैदानी इलाकों में ठंडी हवाओं के चलते तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। हालांकि, पहाड़ों पर अभी कोई मजबूत पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय नहीं है, जिस कारण गिलगित-बाल्टिस्तान से लेकर उत्तराखंड तक बर्फबारी नहीं हो रही है। इसके बावजूद, मैदानी क्षेत्रों में सर्दी का असर बढ़ रहा है और मौसम पूरी तरह से शुष्क बना हुआ है।
तापमान की बात करें तो राजस्थान के सीकर में न्यूनतम तापमान 5.5 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया है, जो मैदानी इलाकों में सबसे कम है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तापमान सामान्य से नीचे बना हुआ है। दिन में धूप निकल रही है, लेकिन हवाओं की दिशा उत्तर की ओर होने के कारण सुबह और रात के समय अच्छी खासी ठंड महसूस की जा रही है।
दक्षिण भारत में नॉर्थ-ईस्ट मानसून की सक्रियता के कारण तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी वाली हवाओं के कारण दक्षिण भारत के कई शहरों में बादल छाए रहेंगे और रुक-रुक कर बारिश हो सकती है। 20 नवंबर के बाद से इन क्षेत्रों में मानसूनी गतिविधियां और तेज हो सकती हैं।
मौसम में सबसे बड़ा बदलाव बंगाल की खाड़ी में देखने को मिल सकता है। अनुमान है कि 22 नवंबर के आसपास बंगाल की खाड़ी में एक कम दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) बनेगा। यह सिस्टम आगे चलकर डिप्रेशन या चक्रवाती तूफान का रूप भी ले सकता है। इसका असर ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के तटों पर देखने को मिलेगा, जहां बादलों की आवाजाही और नमी बढ़ने की संभावना है।
किसानों के लिए यह समय सतर्क रहने का है। मौसम प्रणाली में होने वाले बदलाव, विशेषकर बंगाल की खाड़ी में बनने वाले संभावित चक्रवात को देखते हुए, सलाह दी गई है कि वे अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए पहले से तैयारी रखें। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी हवाओं का रुख बदलने से ठंडक वापस लौटने की उम्मीद है, जिससे सुबह के समय हल्का कोहरा या धुंध देखने को मिल सकता है।,