चक्रवात का खतरा ; हाल ही में हुए हवाओं के रुख में बदलाव के कारण देश के मौसम में बड़ा परिवर्तन आया है। उत्तर से आने वाली ठंडी हवाओं के बजाय अब पूर्वी दिशा से अपेक्षाकृत गर्म हवाएं भारत के अधिकांश हिस्सों में चल रही हैं। इस बदलाव ने उस शुरुआती सर्दी पर ब्रेक लगा दिया है, जिसका अनुभव कुछ इलाकों में होने लगा था। नतीजतन, कई राज्यों में तापमान में वृद्धि दर्ज की गई है।
इस बुलेटिन में ला नीना के कारण भीषण सर्दी पड़ने की अफवाहों को भी खारिज किया गया है, और बताया गया है कि वैश्विक तापमान में वृद्धि (ग्लोबल वार्मिंग) के कारण सर्दियाँ सिकुड़ रही हैं और बसंत ऋतु लगभग समाप्त हो गई है, जिससे गर्मियाँ और भी भीषण हो रही हैं।
वर्तमान में, बंगाल की खाड़ी में एक समुद्री तूफान बनने का खतरा बढ़ रहा है, जिसे अगर यह विकसित होता है तो ‘सेनयार’ नाम दिया जाएगा। मौसम मॉडल्स (ईसीएमडब्ल्यूएफ और जीएफएस) 28 और 29 नवंबर के आसपास इसके लैंडफॉल (तट से टकराने) की ओर इशारा कर रहे हैं।
इसकी संभावित दिशा दक्षिण आंध्र प्रदेश या फिर दक्षिण ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटों की ओर दिखाई दे रही है। मौसम विभाग लगातार इस पर नजर बनाए हुए है और लो प्रेशर एरिया के डिप्रेशन में बदलने (24 तारीख तक) के बाद इसके मार्ग और स्थिति के बारे में और भी स्पष्ट जानकारी मिल पाएगी।
इस संभावित मौसमी सिस्टम के कारण देश के दक्षिणी और तटीय इलाकों में बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी। शुरुआत में, साउथ अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भारी बारिश की संभावना है। इसके बाद, कोस्टल आंध्र प्रदेश, कोस्टल तमिलनाडु, तेलंगाना, केरल, लक्षद्वीप और दक्षिण कर्नाटक के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
महाराष्ट्र में भी दो दिनों के बाद पुणे, सांगली, सतारा और कोल्हापुर जैसे इलाकों में बारिश की संभावना बन रही है। दूसरी ओर, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान और मध्य प्रदेश सहित उत्तर और मध्य भारत के अधिकांश इलाके सूखे रहेंगे। इन क्षेत्रों में कमजोर हवाओं के कारण दिन में तेज धूप खिलेगी और न्यूनतम तापमान में भी थोड़ी बढ़ोतरी होने से कड़ाके की सर्दी फिलहाल दूर रहेगी।