यह मौसम पूर्वानुमान नवंबर के शेष दिनों और दिसंबर की शुरुआत के लिए देश भर में मौसम के संभावित बदलावों पर केंद्रित है। वर्तमान में, उत्तर भारत के पर्वतीय क्षेत्रों में पश्चिमी विक्षोभ (WDs) की कमी के कारण बर्फबारी नहीं हो रही है, और मैदानी इलाकों (जैसे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान) में बारिश की कमी है। हालांकि, मौसम में एक बड़ा बदलाव जल्द ही आने वाला है। विशेषज्ञ ने बताया है कि अक्टूबर और नवंबर की शुरुआत में रिकॉर्ड की गई अधिक सर्दी अब थोड़ी कम हो सकती है, क्योंकि मौसमी पैटर्न बदल रहे हैं।
मौसम में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव दक्षिण में शुरू हो रहा है। मलक्का जलडमरूमध्य के क्षेत्र में एक परिसंचरण बन चुका है, जिसके कारण 22 नवंबर तक बंगाल की खाड़ी के पास एक कम दबाव का क्षेत्र बनने और 23-24 नवंबर तक इसके डिप्रेशन में बदलने की संभावना है। यह सिस्टम आगे चलकर डीप डिप्रेशन या एक चक्रवाती तूफान (Cyclone) का रूप ले सकता है, जिसकी हवा की गति लगभग 70-80 किमी प्रति घंटा तक पहुँच सकती है। यह तूफान नवंबर के अंत और दिसंबर की शुरुआत में भारत के कई राज्यों को प्रभावित करेगा।
यह संभावित चक्रवाती तूफान मुख्य रूप से तमिलनाडु, पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय क्षेत्रों पर सीधा असर डालेगा। इसके अलावा, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर भारत तक भी नमी का प्रवाह बढ़ेगा, जिससे इन क्षेत्रों में भी मौसम बदल जाएगा। इस सिस्टम के कारण, उत्तर की ठंडी हवाओं की क्षमता कम हो जाएगी, जिससे तापमान में थोड़ी वृद्धि होगी।
हालांकि, यह बदलाव उत्तर भारत के लिए एक नई चिंता भी पैदा कर सकता है। चेतावनी दी गई है कि अगर इस दौरान दिल्ली-एनसीआर में बारिश नहीं हुई और हवा की रफ्तार कम रही, तो दक्षिण से आने वाली नमी के कारण प्रदूषण (AQI) 800-900 तक पहुँच सकता है, जिससे वायु गुणवत्ता अत्यंत खराब हो जाएगी।
नवंबर के अंत में उत्तर भारत के पर्वतीय क्षेत्रों पर एक प्रभावशाली पश्चिमी विक्षोभ (WD) भी आने वाला है। बंगाल की खाड़ी से आ रही आर्द्रता और इस WD के मेल से मैदानी क्षेत्रों में भी मौसम बदल सकता है, जिसके तहत 5 दिसंबर तक पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानी इलाकों में कुछ बरसात की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।
इन मौसमी प्रणालियों के आगे बढ़ने के बाद, 6 या 7 दिसंबर के बाद से उत्तर की ठंडी हवाएं फिर से चलने लगेंगी। यदि उस समय कोई मजबूत सिस्टम नहीं बनता है, तो देश के कई हिस्सों में शीत लहर (Cold Wave) का शिकंजा कस जाएगा और एक बार फिर भयंकर ठंड पड़ने की आशंका है।