सेनयार तुफान का खतरा ; बंगाल की खाड़ी में मौसम की एक बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। यह मौसमी प्रणाली जो थाईलैंड से आगे बढ़ी है, अब निम्न दबाव के क्षेत्र के रूप में है, जिसके 24 नवंबर के आसपास एक डिप्रेशन (अवदाब) और 26 नवंबर तक एक चक्रवाती तूफान में बदलने की संभावना है। मोचा के बाद यह इस सीजन का दूसरा चक्रवात होगा।
इसके संभावित रुख पर लगातार नजर रखी जा रही है, क्योंकि अलग-अलग मॉडल इसके तट से टकराने के तीन संभावित क्षेत्र दिखा रहे हैं: उत्तरी आंध्र प्रदेश का तट (विशाखापत्तनम के पास), ओडिशा के ऊपर, या फिर यह रिकर्व करके कोलकाता और बांग्लादेश की ओर भी जा सकता है।
इस शक्तिशाली मौसमी सिस्टम का असर विशेष रूप से दक्षिण भारत में दिखाई देगा। तमिलनाडु, दक्षिणी आंध्र प्रदेश, अंदरूनी तमिलनाडु और मालदीव में भारी वर्षा की संभावना है। इसके अलावा, गोवा, दक्षिणी तेलंगाना, तटीय आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के कई हिस्सों में भी बारिश हो सकती है।
दूसरी ओर, इस सिस्टम के कारण मध्य और पश्चिमी भारत में हवाओं के पैटर्न में बदलाव आएगा। राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में दिन और रात के तापमान में वृद्धि होगी। नतीजतन, इन क्षेत्रों में इस समय पड़ रही कड़ाके की सर्दी में थोड़ी कमी आएगी और लोगों को अभी भारी कंबल या ऊनी कपड़े निकालने में कुछ और देरी होगी।
उत्तरी पहाड़ों पर अभी भी बर्फबारी का इंतजार लंबा होता जा रहा है। नवंबर के अंत तक किसी मजबूत पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) की संभावना नहीं है, इसलिए गिलगिट बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में मौसम शुष्क और साफ रहने वाला है। उत्तर भारत के मैदानी इलाके, जैसे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में भी कड़ाके की सर्दी आने में देरी होगी।
हालांकि, दो दिन बाद उत्तर पश्चिमी हवाएं चलने से दिल्ली-हरियाणा में थोड़ी गिरावट दर्ज हो सकती है, लेकिन यह नवंबर के आखिर में होने वाली सामान्य, तीव्र ठंड से कम ही होगी। बिहार और झारखंड सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों में भी मौसम शुष्क रहेगा और तापमान स्थिर बने रहेंगे।