बन गया तुफान, ईन राज्यों मे भारी बारीश और यहा बढेगी ठंड ; वर्तमान में, बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में एक चक्रवाती तूफान बन चुका है, और श्रीलंका तट के पास मन्नार की खाड़ी के ऊपर एक और निम्न दबाव का क्षेत्र भी विकसित हुआ है, जिसके धीरे-धीरे मजबूत होकर भारतीय क्षेत्रों को प्रभावित करने की संभावना है। एक तरफ जहाँ ये समुद्री सिस्टम सक्रिय हैं, वहीं दूसरी ओर उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड पड़ रही है।
तापमान में आई भारी गिरावट के कारण कई जगहों पर शीत लहर जैसी स्थिति बन गई है। राजस्थान के सीकर में पारा 4℃ तक गिर गया है, जो सामान्य से 6℃ नीचे है। कश्मीर में भी श्रीनगर में न्यूनतम तापमान शून्य से 3.9℃ नीचे चला गया है। तापमान में यह गिरावट ‘पोलर वर्टेक्स’ की स्थिति के कारण हो रही है, जिससे उत्तरी ध्रुव से बर्फीली हवाएँ देश के मैदानी इलाकों तक पहुँच रही हैं।
26 और 27 नवंबर का पूर्वानुमान 26 नवंबर को देश के अधिकांश हिस्सों, खासकर उत्तर, मध्य और पूर्वी राज्यों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क और साफ रहेगा। हालांकि, बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम के कारण आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों, रायलसीमा, तमिलनाडु के तटों और केरल के कुछ दक्षिणी भागों में हल्की बारिश हो सकती है, लेकिन व्यापक रूप से भारी वर्षा की संभावना कम है। 27 नवंबर तक श्रीलंका के पास बना निम्न दबाव का क्षेत्र एक डिप्रेशन में बदल सकता है, जिससे आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के तटों पर हवा की रफ्तार बढ़ जाएगी।
इस दिन भी तमिलनाडु के तटीय इलाकों और दक्षिणी आंध्र प्रदेश में हल्की बारिश जारी रहने का अनुमान है। इस बीच, राजस्थान के पूर्वी हिस्सों (जैसे अजमेर, कोटा) और पश्चिमी मध्य प्रदेश के कुछ भागों में छिटपुट बादलों के साथ हल्की बूंदाबांदी की संभावना बन सकती है।
28 नवंबर और आगे की स्थिति 28 नवंबर को दक्षिण भारत में मौसम प्रणालियों का प्रभाव और भी बढ़ जाएगा। ओडिशा के दक्षिणी तटों से लेकर आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल तक कई जगहों पर घने बादल छाए रहेंगे। तमिलनाडु के तटों पर भारी बारिश शुरू होने की संभावना है, जबकि बाकी जगहों पर वर्षा की तीव्रता अभी भी हल्की बनी रहेगी। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों—पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, और पश्चिमी मध्य प्रदेश—में ठंड और शुष्क मौसम जारी रहेगा।
सुबह के समय पंजाब से बिहार तक और उत्तरी राजस्थान के कुछ हिस्सों में मध्यम से घना कोहरा छा सकता है, जिससे दृश्यता प्रभावित होगी और आवागमन में असुविधा हो सकती है। इन दिनों में इंडो-गंगेटिक मैदानों में सर्दी और बढ़ेगी। पहाड़ों पर जल्द ही एक पश्चिमी विक्षोभ आने की उम्मीद है, जिसके कारण बर्फबारी में भी वृद्धि होगी।